लखीसराय। जिले के चिकित्सा जगत के लिए आज का दिन भावुक स्मृतियों से भरा रहा। शहर की सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. राजकिशोरी जी और उनके पति डॉ. श्यामसुन्दर सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर लोगों ने नम आंखों से उन्हें याद किया। संयोग ही कहा जाएगा कि दो वर्ष पूर्व दोनों पति-पत्नी का निधन महज एक सप्ताह के अंतराल में हो गया था, जिसने पूरे शहर को गहरे शोक में डुबो दिया था।
पंजाबी मुहल्ला, जो कभी डॉ. राजकिशोरी के नाम और उनकी सेवा भावना के कारण विशेष पहचान रखता था, आज भी उनके कार्यों का साक्षी माना जाता है। वे गरीबों और जरूरतमंदों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं थीं। लोगों का कहना है कि डॉ. राजकिशोरी सिर्फ इलाज ही नहीं करती थीं, बल्कि मरीजों को अपनापन और भरोसा भी देती थीं।
उनके निधन के बाद पुराना अस्पताल धीरे-धीरे अपनी पूर्व पहचान खो बैठा, जिसकी कमी आज भी शहरवासी महसूस करते हैं। हालांकि परिवार की चिकित्सीय विरासत को आगे बढ़ाते हुए डॉ. अमित की पत्नी एवं डॉ. राजकिशोरी की बहू डॉ. रूपा ने डीएवी स्कूल के पास नया अस्पताल शुरू किया है। लोग इसे सेवा की उसी परंपरा की निरंतरता के रूप में देख रहे हैं। गरीबों के प्रति वही मान-सम्मान और सौम्य व्यवहार आज भी लोगों के बीच उनकी पहचान बना रहा है।
पुण्यतिथि के अवसर पर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और उनके पुराने मरीजों ने श्रद्धा-सुमन अर्पित कर दंपति के योगदान को याद किया। शहरवासियों का कहना है कि डॉ. राजकिशोरी और डॉ. श्यामसुन्दर सिंह ने लखीसराय को जो सेवा, संवेदना और समर्पण दिया, वह हमेशा स्मृतियों में जीवित रहेगा।
