स्पेशल स्टोरी: एक के नहीं, सब के सरदार।

( अनुभव की बात, अनुभव के साथ )

आज 31 अक्टूबर के दिन सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के अवसर पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ का लोकार्पण करने जा रहे हैं।’ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ देश के सबसे पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर बनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इसकी ऊंचाई 182 मीटर है और यह वर्तमान में विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति है। इसके निर्माण पर करीब तीन हजार करोड़ रुपए का खर्च आया है। 31 अक्टूबर 2013 को सरदार पटेल के 138 वें जन्म दिवस के अवसर पर गुजरात के तात्कालिक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विशालकाय मूर्ति के निर्माण का शिलान्यास किया था। इस प्रतिमा के पास करीब तीन किलोमीटर का ‘वैली ऑफ फ्लावर’ बनाया गया है। जहां दुनियाभर के विविध प्रकार के फूल लगाए गए हैं। स्मारक, उपवन, विशाल संग्रहालय, हॉल, अत्याधुनिक पब्लिक प्लाजा, दुकानें, खाने पीने के स्टाल सहित सारी सुविधाएं यहां उपलब्ध है। यह कहा जा सकता है कि पर्यटन के लिए यह एक शानदार निर्माण है। इसे देखने देश और विदेश से पर्यटकों के यहां पहुंचने की पूरी संभावना है।

इस मूर्ति के निर्माण में सरकार को काफी विरोध का भी सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों के अलावे विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इसका विरोध किया। राजनीतिक दलों की दलील थी कि इतने खर्चे में राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि योजना सहित कई योजनाएं कार्य रूप ले सकती है। परंतु तात्कालिक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी की ना सुनी। भारतीय राजनीति में फर्श से अर्श तक पहुंचने की चाह रखने वाले नरेंद्र मोदी को राजनीतिक लाभ के लिए सरदार पटेल सबसे उपयुक्त नजर आए। दरअसल सरदार पटेल भी गुजरात से हैं और गुजरातियों में सरदार पटेल के प्रति अटूट श्रद्धा है। गुजरात ही क्यों, पूरे देश में सरदार पटेल के लिए सम्मान है। सरदार पटेल की पहचान एक सख्त राजनेता और अखंड भारत के निर्माता के रूप में है। सरदार पटेल जैसे राजनेता किसी एक प्रदेश, किसी एक दल, किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं हो सकते। वह एक राष्ट्रपुरुष हैं। इसमें शायद ही किसी को एतराज हो कि सरदार पटेल को इतना सम्मान क्यों दिया जा रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस प्रकार सरदार पटेल को एक प्रदेश विशेष के रूप में, एक धर्म विशेष के रूप में या फिर एक दल विशेष के रूप में बांधकर राजनीति करने का प्रयास कर रहे हैं, वह सरदार पटेल जैसे व्यक्ति के साथ अन्याय है। नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री रहने के दौर से ही सरदार पटेल को गुजराती, कभी हिंदू, तो कभी आरएसएस के साथ बांधने का गलत प्रयास कर रहे हैं। कभी जवाहरलाल नेहरू से मनमुटाव की बात तो कभी सरदार पटेल को उचित सम्मान ना देने की बात कह कर वह देश को तोड़ने का, लोगों को भड़काने का प्रयास करते रहे हैं। इतिहास में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि सरदार पटेल गुजरात से विशेष प्यार करते थे,वो समस्त राष्ट्र से एक समान प्यार करते थे, ऐसा भी नहीं कि सरदार पटेल हिंदुओं की वकालत करते थे, मुसलमानों को पसंद नहीं करते थे या फिर उनका नेहरू के साथ विवाद रहा हो।

हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री को अपनी वाणी पर, इस प्रकार की सोंच पर नियंत्रण रखना चाहिए। सरदार पटेल किसी की बपौती नहीं हैं। वह एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे, एक सच्चे हिंदुस्तानी थे, किसी भी दायरे में बांधना उनके व्यक्तित्व के साथ अन्याय होगा।

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