रेलवे की करोड़ों की जमीन घोटाला मामले की सीबीसीआईडी से जांच कराने के लिए शासन ने आदेश दे दिया है। मामले में क्राइम ब्रांच ने अब तक तत्कालीन एसडीएम सहित तेरह लोगों को आरोपी बनाते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। चार आरोपी हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे लिये हुए हैं। नायब तहसीलदार फूलपुर निखिल शुक्ल व तत्कालीन एसडीएम राजकुमार द्विवेदी और नामजद बिल्डर कुतुबुदीन व सलाउद्दीन गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में गये और वहां से स्टे मिल चुका है। फूलपुर तहसील के झूंसी क्षेत्र के कटका गांव में रेलवे की 41 बीघा जमीन हड़पने के मामले की जांच क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक बृजेश मिश्र की देखरेख में की जा रही थी। इस सम्बन्ध में झूंसी थाने में फूलपुर तहसीलदार देवेन्द्र कुमार ने 10 अगस्त 2017 को विल्डर कुतुबुदीन और सलाउद्दीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद कार्रवाई करते हुए 27 नवम्बर 2017 को जमीन खरीदने वाले फजील जाफरी, संजय जायसवाल, मो. साजिद खाॅं, मो. वसीद, धर्मवीर यादव और सुरेेश चन्द्र को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पांच दिसम्बर 2017 को क्राइम ब्रांच ने तत्कालीन मुख्य राजस्व अधिकरी भाई लाल सरोज और न्यायिक तहसीलदार आशुतोष कुमार सिंह को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही निलंबित लेखपाल धर्मपाल यादव को गिरफ्तार करके कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया। सूत्रों की माने तो क्राइम ब्रांच को बयान देने वाले कुछ अधिकारी अपने बयान से पलट गये। जांच करने वाले विवेचक पर ही सवाल खड़ा कर दिये गए हैं। एसएसपी ने विवेचक से रिपोट मांगी है। इस बीच जमीन के घोटालेबाज अपनी बचत के लिए विवेचना बदलवाने की जुगत में लग गए हैं। अब वे अपने मनसूबे में काम होते नजर आ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि सत्ता के गलियारे में ऊंची पहुंच के चलते वे विवेचन बदलवाने में कामयाब हो गये। एसएसपी ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच अब सीबीसीआईडी को शासन के आदेश पर दे दी गई है। इस सम्बन्ध में शासन से आख्या मांगी गई थी, जिसकी आख्या मैने भेज दी है। यह आदेश बुधवार की शाम आया। उधर सीबीसीआईडी के एक अधिकारी से वार्ता की गई तो उनका कहना अब तक मुझे कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलते ही जांच शुरू कर दी जायेगी। हालांकि अभी मै दूसरी ड्यूटी में लगा हूं।
सीबीसीआईडी करेगी रेलवे जमीन घोटाला मामले की जांच
