राजनैतिक यात्रा और राजनीति !

( अनुभव की बात, अनुभव के साथ )

राजनीति की यात्राओं का हमारे देश में बड़ा महत्व रहा है। कई प्रसिद्ध राजनेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए विभिन्न प्रकार की यात्रा की और ऐसा देखा गया कि उन्हें इसका लाभ भी मिला। 1983 में देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने कन्याकुमारी से दिल्ली तक पदयात्रा की, 1990 में लाल लाल कृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा की। यात्रा ने लाल कृष्ण आडवाणी और भारतीय जनता पार्टी दोनों को नई पहचान दी और पार्टी की किस्मत चमक गई। आंध्र प्रदेश के कांग्रेस नेता वाई एस आर रेड्डी ने 2003 में पदयात्रा की और 2004 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका काफी लाभ मिला। कांग्रेस को शानदार जीत हासिल हुई। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने पूरे राज्य में साइकिल यात्रा निकाली। अखिलेश अपने पिता से भी अधिक सीट जीतने में सफल रहे और प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। काफी वर्षों से मध्य प्रदेश में सत्ता से दूर रहे दिग्विजय सिंह ने भी कुछ माह पूर्व नर्मदा यात्रा की है, देखना है विधानसभा चुनाव में उन्हें इसका क्या लाभ मिलता है।
राजनेता अपने लाभ के लिए यात्राएं करते रहते हैं। इसी कड़ी में आज (21 अक्टूबर 2018) से बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ” संविधान बचाओ न्याय यात्रा ” की शुरुआत करने जा रहे हैं। उनकी यह संविधान बचाओ न्याय यात्रा गोपालगंज से शुरू होगी और 2 नवंबर को नालंदा में समाप्त होगी। अभी यह यात्रा शुरू भी नहीं हुई है और शनिवार को सत्तारूढ़ जनता दल (यू) के प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने इस पर तीखी टिप्पणी की है। नीरज कुमार ने तेजस्वी को पहले अपने पार्टी के संविधान की रक्षा करने की नसीहत दी है। नीरज कुमार ने कहा है कि लालू प्रसाद यादव को न्यायालय ने चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया है,जबकि वह पार्टी के अध्यक्ष हैं। निश्चित रूप से नीरज कुमार ने कुछ भी गलत नहीं कहा है। उन्होंने अपना फर्ज निभाया है, आखिर जदयू के प्रवक्ता जो ठहरे। लेकिन वो ये क्यों भूल जाते हैं कि मात्र कुछ माह पूर्व तक लालू जी की छत्रछाया में उनकी सरकार चल रही थी और यही तेजस्वी यादव उनकी सरकार के उपमुख्यमंत्री हुआ करते थे और तेजप्रताप स्वास्थ्य मंत्री। मैं उनकी बात से सहमत हूं कि तेजस्वी को संविधान की रक्षा का तब तक हक नहीं, जब तक कि वह पार्टी के अध्यक्ष पद से लालू जी को बर्खास्त नहीं करते। लेकिन नीरज जी ये बता सकते हैं कि क्या उनकी सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों की पूर्ति कर रही है ?क्या उनकी सरकार अपने नैतिक दायित्वों की रक्षा कर रही है ?

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