मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड: रोजी रानी समेत तीन आरोपितों को भेजा जेल

बालिका गृह कांड में गिरफ्तार जिला बाल संरक्षण इकाई की तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी समेत तीन आरोपितों को 13 दिन की पूछताछ के बाद गुरुवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रिमांड अवधि पूरी होने पर सीबीआई ने तीनों आरोपितों को विशेष पॉक्सो कोर्ट में पेश किया। दोनों पक्ष के वकीलों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपितों को जेल भेजने का आदेश दिया। अगली पेशी के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।
20 सितंबर को सीबीआई ने रोजी रानी समेत मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर के चालक विजय तिवारी, मशीनमैन गुड्डू पटेल व पारा लीगल सदस्य संतोष कुमार को गिरफ्तार किया था। 21 सितंबर को सभी को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर सीबीआई आरोपितों को तीन दिन की रिमांड पर पूछताछ ले गई। 24 सितंबर को फिर से चार दिनों की रिमांड की मंजूरी मिली। 28 सितंबर को सकरा फरीदपुर के संतोष कुमार को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए कोर्ट ने शेष तीन आरोपितों की रिमांड अवधि और तीन दिन के लिए बढ़ा दी।
एक अक्टूबर को सीबीआई ने पुन: तीन दिनों की रिमांड की मंजूरी कोर्ट से ली थी। तीन अक्टूबर को विजय तिवारी की निशानदेही पर सीबीआई ने सिकंदरपुर स्थित श्मशान घाट में खुदाई कराई। मौके से मिली अस्थियों को सीबीआई ने जांच के लिए जब्त कर लिया।

निदेशालय स्तर पर सीबीआई नहीं कर रही कार्रवाई’
रोजी रानी की ओर से बहस करते हुए हाईकोर्ट के अधिवक्ता केडी मिश्रा ने कोर्ट से कहा कि सीबीआई ने अपनी जांच की दिशा सीमित कर रखी है। पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में उनके मुवक्किल का कहीं नाम नहीं था। उनके सहयोगात्मक रवैये के बावजूद बगैर एविडेंस ऑफ मेमो के गिरफ्तारी की गई। उन्होंने बताया कि सीबीआई जिलास्तर पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा रही है। राज्यस्तरीय निरीक्षण समिति, निदेशालय, सचिव स्तरीय कार्यालय आदि में जांच नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि नीचे स्तर के अधिकारी तो आदेश का पालन भर करते हैं।

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