अत्यंत शर्मनाक घटना: सीआरपीएफ के शहीद इंस्पेक्टर पिन्टू सिंह के पटना एयरपोर्ट पर शव आने के पश्चात बिहार के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और किसी मंत्री का उसके सम्मान में न जाना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा ?
पटना। सीआरपीएफ के शहीद इंस्पेक्टर पिन्टू सिंह के शहादत की बिहार सरकार द्वारा की गई उपेक्षा पर प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर ने संज्ञान लेते हुये आज सूबे के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को खुला पत्र लिखा है। उन्होंने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि उक्त शहीद इंसपेक्टर का 3 मार्च को पटना एयरपोर्ट पर शव आने के बावजूद मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और कोई भी मंत्री पटना में रहने के बावजूद वहाँ शहीद की शहादत के सम्मान में वहाँ उपस्थित क्यों नहीं हुये।
उन्होंने आगे सवाल किया कि क्या आपलोगों की “राजनैतिक रैली” और प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारियों में किसी “शहीद” की शहादत राजनैतिक फायदों के “ब्लैक होल” में गुम हो जायेगा।
गौरतलब है कि इनके ही प्रयास से पिछले वर्ष मार्च में मध्यप्रदेश के सीआरपीएफ के एक जवान जिसकी आँत पिछले चार सालों से बाहर निकली थी, उसका चार दिनों में आपरेशन हो गया। तब इनके पत्र पर मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मिनटों में संज्ञान लेते हुये उस जवान के इलाज के लिये दस लाख रुपयों तक की मदद का ऐलान कर दिया था। मानवाधिकार कार्यकर्ता श्री दफ्तुआर ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों को ही शिवराज चौहान के “संवेदनशीलता” से सीखने की नसीहत दी है।
उनके द्वारा माननीय मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र और पटना एयरपोर्ट की तस्वीर:-

विशेष अनुरोध( SPECIAL REQUEST):-
कृपया इस पत्र को सर्वप्रथम प्राप्त करनेवाले/देखनेवाले माननीय मुख्यमंत्री/उपमुख्यमंत्री के मुलाजिमों से मेरा विनम्र निवेदन है कि आपके “साहब” की सही आलोचना करने वाली और “आईना” दिखानेवाली (पर मेरे पास इसकी क्षमता नहीं क्योंकि मैं सत्ताविहीन एक अदना सा “फकीर” इंसान हूँ जो जनहित के लिये अपनी क्षमतानुसार आवाज उठाता है) मेरे इस पत्र को कृपया “कुडे़” के ढेर में मत डाल दीजिएगा!?
माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी,
सर्वप्रथम
हर हर महादेव। शिवरात्रि की बधाई। शिव शंकर की कृपा आपके परिवार के ऊपर हो।और आप सदैव धर्म, सच्चाई और भलाई के पथ पर चलें।
माननीय हुजूर कृपया एक “फकीर” इंसान की मंगलकामना सबसे पहले कबूल करें।
कल यानी 3 मार्च की घटना से मैं बेहद दु:खी हूँ! दरअसल मैं देवों के देव “महादेव” का उपासक होने के साथ-साथ एक मानवाधिकार कार्यकर्ता भी हूँ..दिल से!इसलिये संवेदनशील भी हूँ और भावुक भी।
अपना फायदा नहीं देखता हूँ और चापलूसी और जीहजूरी तो साहब …मेरे खून में ही नहीं है क्योंकि एक “देशभक्त” परिवार से आता हूँ।
चूंकि कभी मैं भी “फौजी” बनना चाहता था।बन भी जाता।कुछ कारणों ने रोक दिया।कसक आज भी है।
लिहाजा,जब कभी सेना,अर्धसैनिक बल और पुलिस के लोगों/जवानों की कोई परेशानी देखता हूँ तो बड़ा विचलित हो जाता हूँ
और शायद मेरी इसी भावना को देखकर बिहार के एक राज्यपाल महोदय ने उनसे मुलाकात के वक्त बिहार में सेना और अर्धसैनिक बलों की दुर्दशा पर मुझे एक अंदरूनी रिपोर्ट तैयार करने के लिये बोला था जो मेरे लिये गौरव की बात थी।
लेकिन आप क्या करेंगे ऐसे मामले में माननीय मुख्यमंत्री जी!
कल मीडिया रिपोर्ट में देखा-पढ़ा कि आपके “सुशासन” में “शहीद” की तौहीन हो रही है?यह अत्यंत शर्म की बात है!
कल यानी 3 मार्च को शहीद पिन्टू सिंह जो सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर थे उनका शव पटना एयरपोर्ट पर आता है और पटना में रहते बतौर मुख्यमंत्री न तो आप एयरपोर्ट जाते हैं और न उप मुख्यमंत्री और न ही आपके कैबिनेट का कोई मंत्री!क्या आपलोगों की “राजनैतिक” रैली और प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारियों में किसी “शहीद” की शहादत राजनैतिक फायदों के “ब्लैक हाल” में गुम हो जायेगा!!?
माफ कीजिएगा मुख्यमंत्री जी; शहीद पिन्टू सिंह “प्रोटोकॉल” के हिसाब से सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर के तौर पर आपलोगों के पद के पावर और चमक-दमक के आगे कहीं टिक नहीं पाते, लेकिन जैसी ही उनके नाम के आगे “शहीद” का तमगा लगा वो मुख्यमंत्री क्या प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी ज्यादा सम्मानजनक और महान बन गये।मैं भगवान के बाद शहीद के सामने ही शीश नवाता हूँ।
हो सकता है कि मेरी बात आपको बुरी लगे,हो सकता है कि मैं आपकी सही आलोचना करके “आपके “ब्लैक बुक” में आ जाऊं! पर मैं आपको स्पष्ट कर दूँ कि मेरे जैसे भगवान शिव के उपासक को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे नहीं पता कि शहीद पिन्टू सिंह के पटना एयरपोर्ट पर शव आने की सूचना आपलोगों के पास थी या नहीं?
यह जाँच का विषय है।अगर सूचना के बावजूद आपलोगों नहीं गये तो यह “प्रायश्चित” का विषय है और अगर इसकी सूचना नहीं थी तो इतनी महत्वपूर्ण सूचना से वंचित रखनेवाले अपने ‘मुलाजिमों” पर तत्काल कठोर कारवाई करें।

इस मामले में आपको मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी की “संवेदनशीलता” से सीख लेनी चाहिये जब उन्होंने शनिवार 24 मार्च, 2018 को शाम के चार बजे सीआरपीएफ जवान के एक विचलित कर देने वाले मामले में उन्हें भेजे गये मेरे पत्र पर एक घंटे के अंदर कारवाई शुरू करवा दी।दूसरे दिन 25 मार्च को रामनवमी और रविवार के होने के बावजूद माननीय शिवराज जी ने मध्यप्रदेश के तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी श्री एस के मिश्रा जी के साथ मेरे पत्र के मुद्दे पर विशेष बैठक करके उक्त सीआरपीएफ जवान मनोज सिंह तोमर के इलाज के लिये 10 लाख रुपयों की मदद का ऐलान कर दिया और उसी दिन शाम को मुझे इसकी सूचना भी दी गई और उसके बाद माननीय शिवराज जी के साथ मेरी टेलीफोन पर बात भी हुई।
चार साल से अटके उस जवान का एम्स नई दिल्ली में मात्र चार दिनों में आपरेशन भी हो गया। ( इससे जुड़े डिटेल्स और फोन रिकार्ड मेरे पास उपलब्ध है)
आशा है आप मेरे इस पत्र में उठाई गई बातों पर गंभीरतापूर्वक और संवेदनशील होकर विचार करेंगे और तत्काल उचित निर्णय लेंगे ताकि इससे आहत शहीद पिन्टू सिंह जी के परिवार और आम जनता को दिली शकून मिले सके।
सादर,
विशाल रंजन दफ्तुआर,
मानवाधिकार कार्यकर्ता
Awarded by Hon’ble CHIEF JUSTICE of INDIA (ex) & Many More VVIPs.
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