बांका- रेगिस्तान बन चुका हैं बांका, बूंद-बूंद पानी के लिए मचा हाहाकार

इंट्रो:- सात निश्चय नल-जल योजना की समस्त पंचायतों के मुखिया के चमचा ने दबंगयता के साथ पाईप तक का किया महाघोटाला, मुखिया के चमचों ने पानी का रशीद नहीं तो राशन केरोसीन नहीं कहकर समस्त जनता को बरगलाया, विभाग निश्चिंत

अमित कुमार झा  जिला बांका रेगिस्तान बनेगा नहीं, बल्कि बन चुका हैं. भीषण गर्मी अभी तक का प्रथम चरण हैं, और समस्त बांका जिला बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं.  भूगर्भ जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बिल्कुल नीचले पायदान पर जा चुका हैं. समस्त चापाकल टाय-टाय फिस कर गए हैं,  कुएं तालाब और पोखर भी बहुत पहले ही सूख चुके हैं.

बालू उठाव होने से लगातार जलस्तर नीचे गिरता जा रहा हैं

वर्तमान में लगातार हजारों ट्रेक्टर से बालू उठाव होने से लगातार जलस्तर नीचे गिरता जा रहा हैं फिर भी प्रशासन निश्चिंत हैं. अत्यधिक बालू उठाव होने से नदियां मर रही हैं, वहीं जलस्तर व पर्यावरण की समस्या उत्पन्न हो रही हैं.

प्रशासन को सारे कामों को छोड़कर सबसे पहले बालू उत्खनन पर समस्त बालू घाटों पर कैम्प लगाकर कठोर कार्रवाई करनी होगी  जिससे समस्त पंचायत की जलसंकट की समस्या दूर हो  वरीय प्रशासन को स्पेशल टीम गठित कर पानी समस्या को लेकर गंभीर संज्ञान लेना होगा.  जिससे आम जनता को बूंद-बूंद पानी नसीब हो,  और वर्तमान में पानी के आभाव में समस्त बांका जिला जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं.

भारतीय कैलेंडर ठाकुर पंचांग के अनुसार असली गर्मी बाकी हैं

भारतीय कैलेंडर ठाकुर पंचांग के अनुसार से अभी असली गर्मी तो आना बाकी हैं. गर्मी का अभी मध्य पड़ाव चल रहा हैं. फिर भी समस्त जिला में बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मच गया हैं,  खासकर ग्रामीण क्षेत्र संवेदनशील व असंवेदनशील हरएक क्षेत्रों में पानी की स्थिति भयावह हैं.

कई जगहों पर ऐसी स्थिति देखी जा रही हैं जहां बीच नदी में बर्तन लेकर कुआं खोदकर पानी निकालने को विवश हैं, फिर भी नदी से पर्याप्त मात्रा में पानी नही निकल रहा हैं  सिर्फ गले की प्यास बूझ रही हैं.

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