
नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है. खबरों के मुताबिक- वह काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उनके निधन पर शोक जताया है. नर्मदा नदी को बचाने के लिए अनिल माधव ने बहुत काम किया है. उन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए कई किताबें भी लिखी हैं. पर्यावरण मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल को अभी 1 साल भी पूरा नहीं हुआ था.
भाजपा के थिंक टैंक माने जाते थें अनिल दवे
भारतीय जनता पार्टी का थिंक टैंक माने जाने वाले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे को नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए किए गए कामों ने एक अलग पहचान दिलाई। केंद्र में उन्होंने 5 जुलाई 2016 को केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार संभाला था। दिल्ली के एम्स में गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने से दवे का निधन हो गया। 61 साल के अनिल दवे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।
शुक्रवार को होगा अंतिम संस्कार, मोदी भी हो सकते हैं शामिल
अनिल माधव को शाम 4 बजे भोपाल ले जाया जाएगा, वहीं शुक्रवार शाम को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. अनिल दवे का पैतृक गांव भोपाल के पास बड़नगर में है. अनिल दवे के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत संघ और केंद्र सरकार के कई आला नेता मौजूद रह सकते हैं. अनिल दवे के शव को अंतिम दर्शन के लिए भी रखा जाएगा. अभी उनके पार्थिव शरीर को सरकारी आवास पर रखा गया है, जहां पर लोग अंतिम दर्शन कर रहे हैं.
मोदी ने ट्वीट कर जताया दुख
पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, मैं कल शाम को अनिल दवे जी के साथ था, उनके साथ नीतिगत मुद्दों पर चर्चा कर रहा था. उनका निधन मेरा निजी नुकसान है. उन्हें लोग जुझारू लोक सेवक के तौर पर याद रखेंगे. पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वह काफी जुझारू थे. अनिल दवे का जन्म उज्जैन में हुआ था. अनिल आरएसएस से जुड़े थे. लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने शिवाजी पर किताब लिखी थी. अनिल दवे नर्मदा प्रेमी थे. एक बार खुद हवाई जहाज उड़ाकर और एक बार नाव चला कर नर्मदा की पूरी परिक्रमा की थी.
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