वर्ष 2014 के शारदीय नवरात्रे 25 सितंबर, आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होगें. इस दिन हस्त नक्षत्र, प्रतिपदा तिथि के दिन शारदिय नवरात्रों का पहला नवरात्रा होगा. माता पर श्रद्धा व विश्वास रखने वाले व्यक्तियों के लिये यह दिन विशेष रहेगा. शारदीय नवरात्रों का उपवास करने वाले इस दिन से पूरे नौ दिन का उपवास विधि -विधान के अनुसार रख, पुन्य प्राप्त करेगें.
आश्चिन मास में शुक्लपक्ष कि प्रतिपदा से प्रारम्भ होकर नौ दिन तक चलने वाला नवरात्र शारदीय नवरात्र कहलाता है. नव का शाब्दिक अर्थ नौ है. इसके अतिरिक्त इसे नव अर्थात नया भी कहा जा सकता है. शारदीय नवरात्रों में दिन छोटे होने लगते है. मौसम में परिवर्तन प्रारम्भ हो जाता है. प्रकृ्ति सर्दी की चादर में सिकुडने लगती है. ऋतु के परिवर्तन का प्रभाव जनों को प्रभावित न करे, इसलिये प्राचीन काल से ही इस दिन से नौ दिनों के उपवास का विधान है.
इस अवधि में उपवासक संतुलित और सात्विक भोजन कर अपना ध्यान चिंतन और मनन में लगा से स्वयं को भीतर से शक्तिशाली बना सकता है. ऎसा करने से उसे उतम स्वास्थय सुख के साथ पुन्य प्राप्त होता है. इन नौ दिनों को शक्ति की आराधना का दिन भी कहा जाता है.
नवरात्रों में माता के नौ रुपों की आराधना की जाती है. माता के इन नौ रुपों को हम देवी के विभिन्न रुपों की उपासना, उनके तीर्थो के माध्यम से समझ सकते है.
वर्ष में दो बार नवरात्रों रखने का विधान है. चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नौ दिन अर्थात नवमी तक, ओर इसी प्रकार ठिक छ: मास बाद आश्चिन मास, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से विजयादशमी से एक दिन पूर्व तक माता की साधना और सिद्धि प्रारम्भ होती है. दोनों नवरात्रों में शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्व दिया जाता है.