
जमुुुई: अत्यधिक बारिश के कारण पूरे केरल में महाप्रलय है। लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। सबसे खराब हालत प्रवासी मजदूरों की है। उनके पास कोई विकल्प नहीं है। न रोजगार बची और न जिंदगी बचाने को दो जून की रोटी। इनमें बड़ी संख्या में जमुई जिले से गए चर्मकार मजदूर भाई हैं। लेकिन इनकी फिकर जमुई के सांसद और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को नहीं है। यदि होती तो कम से कम वह केरल में फंसे मजदूर भाइयों की मदद के लिए आवाज जरुर उठाते। ये बातें समाज
देखा जाए तो चिराग पासवान का जमीन से कभी कोई नाता ही नहीं रहा। वह तो मुंह में सोना का चम्मच लेकर पैदा हुए और पैदा होते ही हीरे जवाहरात से खेलने लगे। वह क्या जानें कि एक मजदूर के लिए रोजी रोटी का मतलब क्या है और इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है की उसके लिए परिवार के का पेट चलाना कितना महत्वपूर्ण होता है।
मैं जमुई जिले के सभी प्रवासी मजदूर जो केरल में फंसे हैं, उनकी सलामती के लिए भारत सरकार और केरल सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह प्राथमिकता के आधार पर मजदूरों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं। क्योंकि वे लोग अपने अपने परिवार के लिए कमाऊ सदस्य हैं और उन लोगों के कारण ही उनका पूरा परिवार जिंदा है।
