
आज आपको लिए चलते हैं एक उस खंडहर की तरफ जिसे देख कर आप कहेंगे कि इमारत कभी बुलन्द रहा होगा ।
जी हाँ एक अभिशप्त किला का खंडहर जिसे गयासुद्दीन तुगलक ने 1321 – 25 में बनबाया था । यह दिल्ली का तीसरा नगर था । तुगलकाबाद के किले ।
इतिहास बताता है कि 1320 में खून से सनी तख्ता पलट की घटना में खुसरो शाह ने खिलजी शासन को हथिया लिया था। उसी वर्ष मुलतान के सैन्य गवर्नर के विरोध के बावजूद ग्यासुद्दीन तुगलक शाह-I दिल्ली का सुल्तान बन गया था। तुगलकों ने अपना स्वयं का नगर बसाया जिसे तुगलकाबाद के नाम से जाना जाता है।
ग्यासुद्दीन तुगलक ने मंगोलों के आक्रमण से बचने के लिए विरोधियों के कटे हुए सिरों का पिरामिड बना कर टाँग दिया करता था और वह इन्हें मारने के लिए हाथियों का उपयोग करता था। वास्तुशिल्प की दृष्टि से यह एक अद्भुत किला था। ये किला दो भागों में बंटा है- दक्षिणी दीवारों के साथ-साथ नगर दुर्ग और महल इसका एक भाग है
और इसके उत्तर में बसा नगर दूसरा भाग है।
बताते हैं कि ग़ाज़ी मलिक, जो कि खिलजी राजाओं का जागीरदार था , द्वारा तुगलक को इस जगह पर किला बनाने की सलाह देने पर गयासुद्दीन तुग़लक़ ने इस किले का निर्माण इतने जोश से करबाया कि दिल्ली के सारे मजदूर किले के बनने तक उधर ही रहकर काम करने का हुक्म दे दिया। उसी वक्त निजामुद्दीन औलिया के कुएँ का काम चल रहा था जो इस आदेश के कारण रुक गया। इन दोनों में इस बात से बहस हुई और औलिया साहब ने इनको शाप दे दिया।
उन्होंने शाप दिया कि यह शहर गुजरों द्वारा बसाया जाएगा या खाली ही रह जाएगा। या रहे उज्जर या बसें गुज्जर (यानी या तो किले में लोग रहेंगे और अगर इसे छोड़ा तो इधर गुज्जर बसेंगे। ) गयासुद्दीन की मृत्यु दिल्ली से बाहर होगी, दोनों ही शाप अंततः सच साबित हुए ।
तुगलक काल में कई भवनों का निर्माण हुआ। तुगलकों ने अपनी स्वंय की वास्तुकला का विकास किया। इसके उदाहरण तुगलकाबाद किले, बड़ी मंज़िल अथवा कालू सराय
और बेगमपुर गांव के बीच बिजय मंडल, खिड़की मस्जिद, मालवीय नगर-कालकाजी रोड पर चिराग गांव में चिराग़-ए-दिल्ली की दरगाह के रूप में मौजूद हैं ।
तुगलकाबाद आज भी विशाल पत्थरो से बने किले के लिए प्रसिद्द है। तुगलक साम्राज्य के शासनकाल में यहाँ बहुत सी ऐतिहासिक धरोहरों का निर्माण किया गया था।
साथ ही यहाँ 10 से 15 मीटर ऊँची घुमावदार दीवारों का भी निर्माण किया गया है। जानकार बताते हैं कि इस शहर में पहले कुल 52 प्रवेश द्वार थे। जिनमे से केवल 13 आज बचे हुए हैं। शहर में आज केवल 7 वर्षा जल टैंक बचे हुए हैं।
तुगलकाबाद को तीन भागो में विभाजित किया गया है :
1. टावर के साथ बनाये गये गढ़ का सर्वोच्च पॉइंट बिजय-मंडल है।
2. विशाल शहरी इलाके निर्माण घरों के साथ इसके द्वार के बीच में एक आयताकार ग्रिड के साथ किया गया था।
3. जबकि तीसरे भाग के आसन्न महल क्षेत्र में शाही लोग रहते थे।
टावर के नीचे का यह भाग हमें आज भी देखने को मिलता है। तुगलकाबाद के दक्षिण में पानी का कृत्रिम जलाशय है। जहा पक्की सड़क पर घैसुद्दीन तुगलक की कब्र भी बनी हुई है। किले के दक्षिण-पूर्वी भाग में हमें आदिलाबाद के किले देखने को मिलते हैं। जिनका निर्माण घैसुद्दीन की मृत्यु के उनके उत्तराधिकारी मुहम्मद तुगलक (1325-51) ने करवाया था। तुगलकाबाद किले के भीतर हमें बहुत सी छोटी-छोटी और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरें नजर आती है।
तुगलाकाबाद किला तक आप बस या मेट्रो द्वारा आसानी से पहुँच सकते हैं।
मेट्रो स्टेशन मोहन स्टेट, तुगलकाबाद और बदरपुर स्टेशन हैं।
यहाँ से 717 और 43 नम्बर के बस से आप फोर्ट तक पहुँच सकते हैं। बस स्टैंड तुगलकाबाद है जहाँ से बस गुजरती है। किले के बाहर आप अपनी अपनी गाड़ी पार्क कर सकते हैं ।
प्रवेश शुल्क 25 रुपये है और सुवह 7 बजे से शाम 5 तक खुला रहता है ।





